टीचर ने सबसे बोला , एक कविता लिखकर लाओ |
और कल आके , सबलोग मुझे दिखाओ |
और कल आके , सबलोग मुझे दिखाओ |
तभी बजी घंटी , सब चले गए घर |
मैं तो बड़ी खुश थी पाके यह अवसर |
पहुंची दूसरे दिन स्कूल में , उछल कूद मचाती |
मेरी प्यारी कविता, किसीको न दिखाती |
मेरी प्यारी कविता, किसीको न दिखाती |
जब पढ़ी टीचर ने कविता, वो बहुत खुश हुई |
तारीफ़ की बहुत मेरी, पीठ थपथपायी |
यकींन न हुआ उनको, ये लिखी कविता मैंने |
क्लास को सुनाने के लिये, जोरोंसे लगी पढ़ने |
सुनके तारीफ़ सारी, मैं उड़ने लगी आसमान मैं |
है क्या कोई लकी मेरे जैसा, पूरे इस जहां मैं |
अच्छा हुआ है पास मेरे, रोबोट बोबो नाम का |
कुछ भी कर सकता है वह, है बड़ेही काम का |
लिखी कविता उसने, श्रेय मुझे दिलाया |
एक मशीन मैं मैंने, अच्छा दोस्त है पाया |

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